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Palas ki Jad
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Palash Jad (पलाश जड़) Palash Root (चंद्र ग्रह) Moon Planet (Palash Root)
- ज्योतिष में पलाश के पेड़ और इसकी जड़ का बहुत महत्व है। पलाश (पलास, छूल, परसा, ढाक, टेसू, किंशुक, केसू) एक वृक्ष है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलों के कारण इसे “जंगल की आग” भी कहा जाता है।
- पलाश की जड़ में चंद्र ग्रह का वाश होता हैं। विधि विधान से इस दिव्य पलास जड़ को धारण करने से चंद्रमा जनित समस्त दोष एवं पीड़ाओं का समन होता हैं, चंद्र देव के कृपा दृष्टि प्राप्त होती हैं।
- पलाश के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु, और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है।
- पलाश के पेड़ का इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।
- रविवार के शुभ मुहूर्त में पलाश की जड़ को सूती धागे से लपेटकर दाहिने हाथ पर बांधने से बीमारियों में आराम मिलता है।
- पलाश की जड़ से निकलने वाले अर्क की दो बूंदें आंखों में डालने से नेत्र रोगों में लाभ मिलता है।
- पलाश की जड़ को शुभ मुहूर्त में किसी रविवार के दिन निकालकर दाहिनी भुजा में बांधने से ज्वर दूर होता है।
- जिन व्यक्तियों का सूर्य ग्रह पीढ़ित होकर अशुभ फल दे रहा है वे जातक पलाश की लकड़ी से हवन करे या फिर पलाश की जड़ को अभिमन्त्रित करके चांदी के लाकेट में गले में धारण करें।
- जिस जातक को अधिक परिश्रम करने पर भी व्यापार में सफलता नहीं मिल रही हो, तथा लगातार कर्ज की समस्या बढ़ रही हो। वह व्यक्ति शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को पलाश की जड़ लें आयें। इसे स्वच्छ जल से साफ कर लें उसके पश्चात एक कमरे में सुविधानुसार कोई स्थान चुन कर गंगाजल अथवा गोमूत्र से छींटे मारकर स्वच्छ कर लें एवं उसके उपर एक पात्र रखकर, पात्र पर लाल रेशमी कपड़ा बिछाए, पात्र के बीच में 7 प्रकार अनाज लेकर सभी को मिलाकर एक ढेरी बनायें। इस पर पलाश की जड़ रखें तथा इसी पर दीपक जलायें। धूप जलाकर लक्ष्मी जी के किसी भी मन्त्र की 3 या 4 माला का जाप करें। उसके पश्चात अब इस जड़ को एक लाल कपड़े में बांधकर अपने गल्ले या धन रखने के स्थान पर रख दें। मां लक्ष्मी की कृपा से आपकी आर्थिक तंगी एवं समस्यायें धीरे- धीरे दूर होकर आर्थिक सम्पन्नता आ जायेगी।
- धारण विधि – सोमवार के दिन पलाश जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम चंद्र मंत्र (“ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Madar ke Jad
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मदार जड़ Madar Jad (Madar Root) सूर्य ग्रह (Sun Planet)
- इसको ‘मंदार’, ‘आक’, ‘अर्क’ और ‘अकौआ’ भी कहते हैं। बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों में इसे ‘अकवन’ के नाम से जाना जाता है।
- ज्योतिष शास्त्र में मदार का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य से है।
- इस दिव्य जड़ी को विधिवत् धारण करने से सूर्य ग्रह जनित सभी दोषों का समन होता है एवं भगवान भास्कर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- ज्योतिष शास्त्र में मदार के पौधे और इसकी जड़ को कई फ़ायदों से जोड़ा गया है।
- मदार की जड़ को कमर में बांधने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- मदार की जड़ को अभिमंत्रित करके दाहिनी भुजा पर बांधने से सौभाग्य बढ़ता है।
- मदार के पौधे की जड़ को लाल धागे से बांधकर रोगी के पैर में बांधने से फ़ीलपांव में आराम मिलता है।
- मदार के पौधे को घर के सामने लगाने और नियमित रूप से पूजा करने से धन की कमी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
- मदार के पौधे को घर के अग्नि कोण यानी कि दक्षिण पूर्व के बीच दक्षिण या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए।
- मदार के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ़्लेमेटरी गुण होते हैं। इन पत्तों का इस्तेमाल करने से चोट जल्दी भरती है और बवासीर में भी आराम मिलता है।
- रविपुष्प नक्षत्र में लाई गई मदार की जड़ को दाहिने हाथ में धारण करने से आर्थिक समृधि में वृद्धि होती हैं।
- रविपुष्प में उसकी मदार की जड़ को बंध्या स्त्री भी कमर में बंधे तो संतान होगी।
- अगर किसी जातक पर तांत्रिक अभिकर्म किया गया है, तो मदार जड़ का एक टुकड़ा अभिमंत्रित करके कमर में बांधने से तांत्रिक क्रिया निष्फल हो जाती है।
- अगर कोई व्यक्ति गंभीर रोग से ग्रसित है, तो रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में मदार की जड़ को या बंध्या स्त्री अपनी कमर में बांध ले, तो उसे सन्तान का सुख अवश्य मिलेगा।
- अगर विवाह के काफी साल गुजर गए हैं और अभी तक बच्चे की किलकारियां आंगन में नहीं गूंजी हैं, तो शुक्रवार के दिन मदार पेड़ की जड़ को उखाड़ लें और फिर उसको उस कमरे में बांध दें, जिसकी संतान न हो रही हो।
- धारण विधि – रविवार के दिन मदार जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम सूर्य मंत्र (“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बांध लें।
Arandmool ki Jad
- अरंड मूल जड़ Arandmool jad शुक्र ग्रह (VENUS) Arandmool Root
- अरंड मूल की जड़ शुक्र ग्रह ग्रह से संबंधित है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र को विवाह, धन वैभव, काम आदि का कारक माना जाता है। अरंड मूल धारण करने से जातक के जीवन में प्रेम एवं विवाह संबंध अच्छा बना रहता है। इससे शुक्र के बुरे प्रभाव नष्ट हो जाते हैं।
- स्वास्थ्य की दृष्टि से यह जड़ी अस्थमा, ज्वर, खाँसी, फेफड़े और श्वसन नलिकाओं आदि से संबंधित रोगों को दूर करने में भी सहायक है।
- अरंडी की जड़ को छाछ के साथ पीसकर पीने से उल्टी और दस्त बंद हो जाते हैं।
- अरंडी की जड़ का ब्रेसलेट पहनने से सकारात्मक ऊर्जा और वाइब्स मिलते हैं
- धारण विधि – अरंड मूल को शुक्रवार के दिन धारण करना चाहिए। शुक्रवार के दिन सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी गर्दन में धारण करें।
Dhatura ki Jad
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Dhatura Jad धतूरा जड़ (Dhatura Root) शनि ग्रह (Saturn Planet)
- ज्योतिष के मुताबिक, धतूरे की जड़ से कई फ़ायदे होते हैं। धतूरे की जड़ को बांधने से धन से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं।
- सामान्य रूप से शनि ग्रह अच्छा नहीं माना जाता है, परंतु यदि जीवन में इसकी कृपा दृष्टि बरसती है तो व्यक्ति के भाग्य खुल जाते हैं। यह हमारे कर्म का कारक होता है। शनि दोष के कारण व्यक्ति का जीवन कष्टमय गुजरता है। इसलिए इसके बुरे प्रभाव से बचने एवं कृपा दृष्टि पाने के लिए जड़ को धारण करना शुभ माना जाता है। आयुर्वेद की दृष्टि से तंत्रिका और गठिया रोग से मुक्ति पाने के लिए भी यह बेहद कारगर है।
- अगर किसी व्यक्ति को शनि दोष है, तो शनिवार को धतूरे की जड़ को काले कपड़े में लपेटकर दाहिनी भुजा पर बांधना चाहिए।
- अगर किसी व्यक्ति को किसी से डर लगता है, तो अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ को घर में लाकर रखना चाहिए।
- धतूरे की जड़ को सोमवार को बाएं हाथ की कलाई में बांधने से कई समस्याओं का समाधान मिलता है।
- धतूरे की जड़ को घर के मेन गेट पर बांधने से धन की कमी नहीं होती और तिजोरी भरती है।
- धतूरे की जड़ से मस्तिष्क संबंधी रोगों में भी फ़ायदा मिलता है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनैश्चराय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी काले रंग के कपड़े में लपेटकर दाहिनी बाजू या कलाई में बाँधें।
Nagarmotha ke Jad
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नागरमोथा की जड़, राहु ग्रह (Rahu Planet) Nagar Motha ki jad (Nagar Motha Root)
- नागरमोथा की जड़ में राहु देव का वाश होता हैं, नागरमोथा की जड़ को धारण करने से राहु ग्रह संबंधित दोष दूर होते हैं एवं राहु देव की कृपा मिलती हैं।
- इससे मानसिक तनाव एवं पुरानो रोगों से मुक्ति मिलती है। यदि जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है तो इस जड़ को धारण करने से यह दोष शांत होता है। नागरमोथा की जड़ व्यक्ति में साहस बढती है और राह में आने वाली कठिनाई को दूर करती है।
- नागरमोथा की जड़ को धारण करने से साहस बढ़ता है और राह में आने वाली कठिनाइयां दूर होती हैं। शनिवार के दिन इस दिव्य जड़ी नागरमोथा की जड़ को धारण करें।
- इसे पुष्य नक्षत्र में ले आएं और बुधवार को नीले धागे में गले में धारण करें।
- मानसिक तनाव, शारीरिक रोग और काल सर्प दोष से बचने तथा नौकरी से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए नागरमोथा की जड़ वरदान साबित होती है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन नागरमोथा की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम राहु मंत्र (“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ को सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिने हाथ की बाजू में बाँध लें।
Pipal Ki Jad
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पीपल जड़ Pipal Jad (Pipal Root)
- पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए इसकी जड़ को धारण करना एवं घर के मुख्य द्वार पर बांधने से घर में सकारात्मकता आती है सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।
- इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और ग्रह दोष से भी छुटकारा मिलता है।
- शुक्रवार को पीपल की जड़ बांधने से घर की दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक स्थिति मज़बूत होती है।
- हाथ में पीपल की जड़ पहनना शुभ माना जाता है।
- पीपल की जड़ में अर्पित थोड़ा सा जल घर में लाकर छिड़कने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
- किसी मंदिर में पीपल का एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति की कुंडली के सभी ग्रह दोष शांत हो जाते हैं।
- पीपल के पेड़ की जड़ को घर के मुख्य द्वार पर बांधने से धन बाधित करने वाले दोषों को भी दूर किया जा सकता है। अगर घर के मुख्य द्वार पर पीपल की जड़ को शुक्रवार के दिन बांधा जाए तो इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत बनती है। तंगी, कर्ज, आखिक खर्च आदि से छुटकारा मिल जाता है।
- इसके अलावा, घर के मुख्य द्वार पर पीपल के पेड़ की जड़ बांधने से घर का वास्तु दोष भी दूर हो जाता है। अगर आपका घर या घर की कोई भी वस्तु उचित स्थान या उचित दिशा में नहीं है तो उससे पैदा होने वाला वास्तु दोष अपने आप खत्म हो जाएगा। साथ ही, ग्रह दोष से भी छुटकारा मिल जाएगा।
- ज्योतिष शास्त्र कहता है कि पीपल के पेड़ में सभी देवी और देवताओं का वास होता है। ऐसे में अगर पीपल के पेड़ की जड़ को घर के मुख्य द्वार पर बांधा जाए तो इससे घर के मुख्य द्वार पर दिव्य शक्तियों का संचार होने लगता है। घर के मुख्य द्वार पर सकारात्मकता बढ़ने लगती है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह नष्ट हो जाता है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन पीपल जड़ सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंत्र (“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को पीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बांधे।
Durva Ke Jad
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दूर्वा दूब जड़ (Durva Dub Jad) Rahu Planet (राहु ग्रह) Durva Dub Root
- दूर्वा जड़ी को हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना गया है। इसका इस्तेमाल पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में किया जाता है।
- दूर्वा को 'शतवल्ली' और 'शतपरवा' भी कहा जाता है।
- ज्योतिष शास्त्र में दूर्वा का बड़ा आध्यात्मिक महत्व है प्रत्येक शुभ कार्य में दूर्वा का उपयोग किया जाता है।
- राहु ग्रह संबंधित दोष निवृत्ति हेतु दूर्वा जड़ अत्यंत लाभकारी जड़ी सिद्ध होता है। शास्त्रअनुरुप विधिवत दूर्वा जड़ धारण करने से राहु जनित सभी दोषों का समन होता है।
- दूब के जड़ का काढ़ा पीने से वस्तिशोथ, सूजाक, और मूत्रदाह में आराम मिलता है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन दूर्वा जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम राहु मंत्र (“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रों सः राहवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को नीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Ashwagandha Ke Jad
- अश्वगंधा जड़ Ashwagandha Jad (केतु ग्रह) Ketu Planet, Ashwagandha Root
- अश्वगंधा की जड़ को लाल रंग के कपड़े में बांधकर मंगलवार या शनिवार को सीधे हाथ में बांधने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- केतु ग्रह समृद्धि, स्वास्थ्य, धन का प्रतीक माना जाता है। अश्वगंधा जड़ी धारण करने से व्यक्ति को सर्पदंश आदि का ख़तरा नहीं होता है। इसके साथ ही अश्वगंधा जड़ी केतु ग्रह के अन्य बुरे प्रभावों भी बचाती है। यह जातकों के रोग-दोष मुक्त करने में भी सहायक है। जैसे- चर्म रोग, मूत्र मार्ग में संक्रमण आदि।
- इससे सुख-समृद्धि आती है और पर्सनल और प्रोफ़ेशनल लाइफ़ में सम्मान बढ़ता है।
- अश्वगंधा की जड़ का प्रतिनिधि ग्रह केतु है। केतु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने और बुरे प्रभाव को कम करने में अश्वगंधा चमत्कार की तरह काम करता है।
- अश्वगंधा की जड़ को नीले रंग के कपड़े में बांधकर शनिवार को सीधे हाथ में बांधने से स्मॉलपॉक्स, यूरीन इंफ़ेक्शन, त्वचा संबंधी रोगों में आराम मिलता है।
- जीवन में चल रही मानसिक परेशानियां भी इससे कम होती हैं।
- धारण विधि – यह उपाय बुधवार के दिन करें। बुधवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम केतु मंत्र (“ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को काले रंग के कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Kush Ke Jad
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Kush Jad (कुश जड़) Kush Root (केतु ग्रह) Ketu Planet
- कुश को दर्भ और पवित्रम के नाम से भी जाना जाता है।
- कुश घास का इस्तेमाल पूजा-पाठ, श्राद्ध, और अन्य धार्मिक कामों में किया जाता है।
- केतु को अध्यात्म और मोक्ष का कारक माना गया है।
- कुश की जड़ में केतु देव का वाश होता हैं। इस दिव्य जड़ी को विधिवत् धारण करने से केतु ग्रह जनित सभी दोषों को समन होता हैं एवं केतु ग्रह का आशीष मिलता हैं।
- धनदायक कुश मूल – कुश की “जड़” को धन प्रदायनी कहा गया है। रवि पुष्य योग या रविपुष्य योग में जाकर कुश की जड़ लाकर कुश मूल की साधना की जाती है, सिद्ध करने के पश्चात कुश मूल को किसी लाल कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी या भण्डार गृह में रख दें, और प्रति दिन धूप दीप के द्वारा पूजन करते रहें। यह प्रयोग धन-धान्य बढ़ाने वाला कहा गया है।
- भावप्रकाश के मतानुसार कुश त्रिदोषघ्न और शैत्य-गुण-विशिष्ट है। उसकी जड़ से मूत्रकृच्छ, अश्मरी, तृष्णा, वस्ति और प्रदर रोग को लाभ होता है।
- गरुड़ जी अपनी माता की दासत्व से मुक्ति के लिए स्वर्ग से अमृत कलश लाये थे, उसको उन्होंने कुशों पर रखा था। अमृत का संसर्ग होने से कुश को पवित्री कहा जाता है। (महाभारत आदिपर्व के अध्याय 23 का 24 वां श्लोक) मान्यता है कि जब किसी भी जातक के जन्म कुंडली या लग्न कुण्डली में राहु/केतु महादशा की आती है तो कुश के पानी मे ड़ालकर स्नान करने से राहु/केतु की कृपा प्राप्त होती है।
- "नास्य केशान् प्रवपन्ति, नोरसि ताडमानते" – (देवी भागवत 19/32) अर्थात कुश धारण करने से सिर के बाल नहीं झडते और छाती में आघात यानी दिल का दौरा नहीं होता। उल्लेखनीय है कि वेद ने कुश को तत्काल फल देने वाली औषधि, आयु की वृद्धि करने वाला और दूषित वातावरण को पवित्र करके संक्रमण फैलने से रोकने वाला बताया है।
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