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Siddha Raj Mohini Jadi | राज मोहिनी जड़ी | Pair - Male & Female | Tantra Astro
- Raj Mohini jadi is a special kind of jadi an extraordinary herb which is found in the forest.
- It is used in special kinds of tantric karma especially for attraction sammohan, vashikaran.
- it is specially wished by experts or tantrik priests for particular purposes, for love, health wealth, and much more.
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Specification :-
| Length: | 3 Inch |
| Product: | Jadi (2 Pis) |
| Colour: | Brown |
| Origin: | India |
| Shape: | Straight |
Delivery Details
| Delivery: | Within 3 - 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
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| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
Gular ki Jad
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गुलर जड़ Gular Jad (शुक्र ग्रह) Venus Planet (Gular Root)
- ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, गूलर की जड़ को बहुत शुभ माना जाता है। गूलर जड़ी का संबंध शुक्र ग्रह से होता है और शुक्र ग्रह को धन, ऐश्वर्य, वैभव, और लग्ज़री लाइफ़ का कारक माना जाता है इसलिए, गूलर की जड़ को धारण करने से कई फ़ायदे हैं।
- शुक्र ग्रह का रत्न हीरा है। यदि कोई व्यक्ति हीरा धारण नहीं कर पा रहा तो वह गूलर की जड़ को अपने हाथ में धारण कर सकता है। इसकी जड़ हाथ में बांधने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।
- ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, गूलर वृक्ष शुक्र का प्रतिनिधि वृक्ष है। इसमें नियमित रूप से जल अर्पित एवं जड़ी धारण करने से शुक्र की अनुकूलता प्राप्त होती है।
- शुक्र भौतिक सुख-सुविधाओं, प्रेम, सौंदर्य, आकर्षण, लावण्य, यौन सुख, प्रेम विवाह आदि का प्रतिनिधि ग्रह है।
- इसलिए शुक्र को अनुकूल बनाने के लिए गूलर के वृक्ष के जड़ को धारण करना महत्वपूर्ण है। जन्मकुंडली में शुक्र अशुभ स्थिति में हो तो गूलर जड़ के प्रयोग से शुक्र की पीड़ा को शांत किया जा सकता है।
- इसे पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में ले आएं एवं इसे चांदी के लॉकेट में या चांदी की चेन में शुक्रवार को धारण करे इससे आपकी शुक्र सम्बंधित समस्याएं दूर होंगी।
- इसे चांदी के लॉकेट में या चांदी की चेन में शुक्रवार को धारण करें इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। गुप्त रोगों से मुक्ति मिलती है। भौतिक सुखों की प्राप्ति एवं सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है।
- कला, मीडिया, फ़िल्म, या फ़ैशन से जुड़े लोगों के लिए ये जड़ बेहद ही शुभ साबित होता है। धन-संपदा एवं मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती हैं।
- आर्थिक संपन्न्ता, धन प्राप्ति, भूमि-भवन खरीदने की इच्छा है, तो गूलर की जड़ चांदी के ताबीज में भरकर धारण करें।
- शुक्र ग्रह की कृपा पाने के लिए गूलर की जड़ को सफ़ेद कपड़े में शुक्रवार के दिन धारण करें।
- धारण विधि – शुक्रवार के दिन गुलर की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम शुक्र मंत्र (“ॐ द्रां द्रीं द्रों सः शुक्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Bichua ki Jad
- बिच्छू बिछुआ जड़ (Bichu Jad) Planet Saturn (शनि ग्रह) Bichu Root
- ज्योतिष शास्त्र में बिच्छू घास यानी बिच्छू बूटी की जड़ का काफ़ी महत्व है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, बिच्छू बूटी की जड़ में शनि का वास होता है। बिच्छू बूटी की जड़ से बनी अंगूठी पहनने से शनि का प्रभाव कम होता है।
- नीलम बहुत महंगा होता है और आम लोगों के लिए इसे खरीदना मुश्किल होता है। ऐसे में, अगर आप शनि देव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो नीलम की जगह बिच्छू बूटी की जड़ का इस्तेमाल किया जा सकता है एवं बिच्छू बूटी की जड़ से शनिदोष से बचा जा सकता है।
- नीलम रत्न की जगह बिच्छू बूटी की जड़ का प्रयोग करके आप निश्चित रूप से शनि ग्रह के दोषों से बच सकते हैं ।
- बिच्छू बूटी हिमाचल प्रदेश में बहुत होती है । कोमल कांटेदार पत्तों को स्पर्श करने से वृश्चिकदंश जैसी पीड़ा होने लगती है ।इसीलिए इसका नाम बिच्छू बूटी है।
- बिच्छू बूटी को धारण करने का तरीका – किसी भी शुक्ल पक्ष के शनिवार को सुबह पुष्य नक्षत्र में बिच्छू बूटी की जड़ उखाड़कर ले आएं। इस जड़ के टुकड़ों को चांदी के ताबीज में भरकर शनिमंत्र से अभिमंत्रित करें और फिर इसे धारण करें।
- बिच्छू बूटी की पत्तियों का दरदरा लेप बनाकर अगर सूजे हुए जोड़ों में लगाया जाए, तो जोड़ों के दर्द में कमी होती है।
- बिच्छू बूटी में एंटी-अस्थमैटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाये जाते हैं।
- यदि आप की नौकरी में समस्याएं आ रही हैं या फिर आप जोड़ों के दर्द की समस्या से पीड़ित हैं तो इसका कारण आपकी कुंडली में शनि ग्रह का कमजोर होना है। यदि आप शनि ग्रह से संबंधित अनुकूल परिणाम प्राप्त करना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्त में बिच्छू मूल धारण करने से आपका शनि ग्रह मजबूत होगा और साथ ही साथ आपको जोड़ों में दर्द, टांगों एवं दांतो से संबंधित बीमारियों तथा एसिडिटी और वात रोगों से मुक्ति मिलेगी।
- धारण विधि – शनिवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनैश्चराय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी काले रंग के कपड़े में लपेटकर दाहिनी बाजू या कलाई में बाँधें।
Safed Chandan Ki Jad
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सफ़ेद चंदन जड़ (Safed Chandan Jad) Safed Chandan Root (White Sandalwood Root) राहु ग्रह (Rahu Planet)
- चन्दन की जड़ी राहु ग्रह जनित सभी दोषों, पीड़ाओं एवं बुरे प्रभाव से बचाती है। ज्योतिष में राहु ग्रह क्रोध, नशा, धुआं, बुरी संगत, मांसाहार, चालाकी, क्रूरता, लालच, अपशब्द आदि का कारक होता है।
- राहु दोष को दूर करने में चन्दनमूल की जड़ी बेहद कारगर है। इसके अलावा यह जड़ी शारीरिक रोगों को दूर करती है, जैसे मूत्र संबंधी विकार, त्वचा रोग, गैस्ट्रिक, चिड़चिड़ापन, पेचिश और बुखार आदि।
- महिलाओं को गर्भाशय से जुड़े रोग, त्वचा की समस्या, गैस प्रॉब्लम, दस्त, और बुखार में सफ़ेद चंदन की जड़ का फ़ायदा होता है।
- बार-बार दुर्घटनाएं होने पर भी सफ़ेद चंदन की जड़ का इस्तेमाल करना चाहिए।
- चंद्रमा की स्थिति मज़बूत करने के लिए, कनिष्ठा उंगली से माथे पर सफ़ेद चंदन लगाना चाहिए।
- वैवाहिक जीवन में खुशियां लाने के लिए, किसी शुभ मुहूर्त में चंदन की जड़ को गंगाजल से शुद्ध करके फ़िटकरी के साथ कमर में बांधा जाता है।
- चंदन की जड़ से स्नान करने से शनि की अशुभता दूर होती है। ऐसा 40 दिनों तक करना चाहिए।
- सफ़ेद चंदन का टुकड़ा या जड़ को शनिवार या सोमवार को सफ़ेद या भूरे रंग के कपड़े में बांधकर पास रखना चाहिए।
- धारण विधि – शनिवार / बुधवार के दिन सफेद चंदन जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम राहु मंत्र (“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध ले।
Kela ki Jad
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केला जड़ (Kela Jad) गुरु ग्रह (बृहस्पति ग्रह) Planet Jupiter (Kela Root)
- हिन्दू ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति ग्रह गुरु, ज्ञान एवं सद्गुणों का कारक होता है। इस दिव्य जड़ी को धारण करने से जातक के स्वभाव में मानवीय प्रेम, धार्मिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान की वृद्धि होने लगती है।
- वैवाहिक जीवन में सुख शांति लाने एवं संतान प्राप्ति के लिए भी जड़ को धारण किया जाता है। वहीं जिन छात्रों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लगता है, उनके लिए भी यह जड़ लाभकारी है। इस जड़ को हाथ में बांधने से सुख-संपत्ति, ज्ञान में वृद्धि होती है।
- संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, तो भी इसको धारण किया जाता है।
- अगर आपको पेट की समस्या है, तो भी आप इस जड़ को हाथ में बांध सकते हैं।
- बृहस्पति के कारण विवाह में अड़चन आ रही हो, तो केले की जड़ को हाथ में धारण करना फ़ायदेमंद रहता है।
- केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है और इसकी पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- केले की जड़ की परिक्रमा करने से पैसों की तंगी भी दूर होती है।
- केले की जड़ की पूजा करने से गुरु एवं मंगल दोष दूर होता है।
- गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करने से भक्तों की सभी शुभ मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- बृहस्पति के शुभ प्रभाव के लिए केले की जड़ धारण करनी चाहिए इसे विशाखा नक्षत्र में ले आएं एवं इसे पीले धागे या पीली धातु में भरकर बृहस्पतिवार को गले में धारण करें इससे आपका बृहस्पति ग्रह मजबूत होगा।
- केले की जड़ को आंखों के लिए भी फ़ायदेमंद माना जाता है।
- अगर किसी व्यक्ति की शादी में बाधा आ रही है तो गुरुवार के दिन पीले कपड़े पहनकर केले की जड़ की पूजा करने से शादी के योग बनते हैं।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति धनवान होने की इच्छा रखता है उसे केले की जड़ को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रखना चाहिए, ऐसा करने से व्यक्ति की तिजोरी कभी खाली नहीं होती।
- केले की जड़ में खास प्रकार के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा पर होने वाली सूजन व लालिमा को ठीक कर देते हैं। साथ ही कुछ लोगों की त्वचा पर यह एक एंटी एलर्जिक के रूप में भी काम करती है, जिससे खुजली व जलन जैसी समस्याओं को भी कम किया जा सकता है।
- केले की जड़ के रस में ऐसे खास प्रकार के तत्व पाए जाते हैं, जो पेट में अतिरिक्त मात्रा में बन रहे गैस्ट्रिक एसिड के उत्पादन को रोक देते हैं। साथ ही इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण छालों की लालिमा को कम करने में मदद कर सकते हैं।
- धारण विधि – गुरुवार के दिन केले की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम गुरु मंत्र (“ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों सः गुरुवै नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को पीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Khirni ke Jad
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खिरनी जड़ Khirini Jad (Khirni Root) Moon Planet ( चंद्र ग्रह)
- ज्योतिष के मुताबिक, खिरनी की जड़ को धारण करने से चंद्रमा से जुड़े बुरे प्रभाव कम होते हैं और मन शांत रहता है।
- खिरनी की जड़ को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर सोमवार के दिन लाकेट में धारण करने से चंद्रमा मज़बूत होता है एवं चंद्र ग्रह संबंधित दोषों का समन होता हैं।
- चंद्रमा से जुड़े बुरे प्रभाव के कारण व्यक्ति कफ़ और लिवर से जुड़ी बीमारियों से घिरा रहता है और मानसिक रूप से विचलित रहता है।
- खिरनी की जड़ चंद्र ग्रह से संबंधित दोषों को दूर करने में सहायक है। चंद्रमा को मन एवं माता का कारक माना जाता है। यदि आपकी जन्म कुडली चंद्र ग्रह राहु, केतु या शनि से प्रभावित है या कोई दुर्योग हैं तो आपको खिरनी की जड़ को धारण करना चाहिए। यह जड़ हमारे मन को एकाग्र करती है।
- धारण विधि – इस उपाय को सोमवार के दिन करें। सोमवार के दिन खिरनी की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें
Sharpunkha ki Jad
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Sharpunkha ki Jad (शरपुंखा जड़) Sharpunkha Root
- ज्योतिष के मुताबिक, शुक्र ग्रह को आकर्षण, ऐश्वर्य, सौभाग्य, धन, प्रेम, वैभव, सौंदर्य, कला, संगीत, कामवासना का कारक माना जाता हैं।
- शुक्र ग्रह को तुला और वृषभ राशि का स्वामी माना जाता है। कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति के हिसाब से व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है। शुक्र ग्रह मज़बूत होने से व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व का होता है और उसे भौतिक सुखों की प्राप्ति कम उम्र में ही हो जाती है।
- वहीं, शुक्र ग्रह कमज़ोर होने से व्यक्ति को शारीरिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- शुक्र के लिए सरपोंखे की जड़ धारण करनी चाहिए इसे पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में ले आएं एवं चांदी के लॉकेट या सफेद कपड़े में या चांदी की चेन में शुक्रवार को धारण करें जिससे आपकी शुक्र जनित समस्त दोष, पीड़ा एवं समस्याएं दूर होंगी।
- अंग्रेज़ी में इसे पर्पल टेफ्रोसिया, वाईल्ड इण्डिगो या फिश पॉयजन ट्री के नाम से जाना जाता है। इसके अन्य स्थानीय नाम है – आहुहु, बज़्रदंती, शरपुंखा, प्लीहशत्रु, कण्ठपुंखिका, श्वेतपुंखा, कंठालु, कालिका, वाणपुंखा, सरफोंका, तथा बननील। शरपंखा का पौधा नील (Indigo) के पौधे से मिलता-जुलता है।
- धारण विधि – शुक्रवार के दिन शरपुंखा जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम शुक्र मंत्र (“ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Aprajita Jad
Sammi ki Jad
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Sammi Jad (शम्मी जड़) Sammi Root (शनि ग्रह) Saturn Planet
- ज्योतिष के अनुसार, जो लोग नीलम रत्न धारण नहीं कर सकते वो लोग शमी की जड़ हाथ में बांध सकते हैं। जिसका फल भी व्यक्ति को नीलम के बराबर ही प्राप्त होगा और शनि दोष, साढ़ेसाती इत्यादि से जल्द छुटकारा मिल जाता हैं। शमी को गणेश जी का प्रिय पेड़ माना जाता है।
- सामान्य रूप से शनि ग्रह (पाप ग्रह) अच्छा नहीं माना जाता है, परंतु यदि जीवन में इसकी कृपा दृष्टि बरसती है तो व्यक्ति के भाग्य खुल जाते हैं। यह हमारे कर्म का कारक होता है। शनि दोष के कारण व्यक्ति का जीवन कष्टमय गुजरता है। इसलिए इसके बुरे प्रभाव से बचने एवं कृपा दृष्टि पाने के लिए इस दिव्य शम्मी जड़ को धारण करना शुभ माना जाता है।
- आयुर्वेद की दृष्टि से तंत्रिका और गठिया रोग से मुक्ति पाने के लिए भी यह बेहद कारगर हैं।
- शमी की जड़ को हाथ में बांधने से शनि दोष और साढ़ेसाती से जल्द छुटकारा मिलता है।
- शमी की जड़ को तकिये के नीचे रखने से बुरी शक्तियां प्रभावित नहीं कर पातीं और मन शांत होता है।
- शमी की जड़ को घर की पश्चिम दिशा में काले कपड़े में लपेटकर रखने से शनिदेव खुश होते हैं और नकारात्मकता दूर होती है।
- धारण विधि – शमी की जड़ को शनिवार के दिन धारण करना चाहिए। शनिवार के दिन शम्मी जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम शनि मंत्र (“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को नीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Vidhara ki Jad
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Vidhara ki Jad विधारा जड़ (बुध ग्रह) Mercury Planet
- विधारा मूल की जड़ का उपयोग बुध के बुरे प्रभाव कम करने के लिए किया जाता है। बुध के बुरे प्रभाव से व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता प्रभावित होती है और उसकी निर्णय लेने की क्षमता कम होती है। विधारा मूल की जड़ को बुधवार के दिन हरे रंग के कपड़े में बांधकर सीधे हाथ कंधे पर बांधा जाता है। इस जड़ को बांधने वालों को भगवती मां दुर्गा की आराधना करना चाहिए। इसके प्रभाव से नर्वस डिस्ऑर्डर, ब्लड प्रेशर, अल्सर और एसिडिटी में आराम मिलता है।
- वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह भाषा, संवाद शक्ति, बुद्धि-विवेक, भाव-भंगिमा का कारक होता है, जबकि घबराहट एवं क्रोध इसके नकारात्मक पक्ष को दर्शाते हैं। अतः विधारा मूल को धारण करने से बुध के सभी नकारात्मक पक्ष शून्य हो जाते हैं, बुध ग्रह संबंधित सभी दुर्योग का समन होता हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती हैं।
- आयुर्वेद विज्ञान के अनुसार विधारामूल की जड़ अल्सर, एसिडिटी एवं ब्लड प्रेशर जैसे रोगों को दूर करने में भी सहायक होता है।
- धारण विधि – बुधवार के दिन इसे को धारण करें। बुधवार के दिन विधारा मूल की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम बुध मंत्र (“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को हरा कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Khar ke Jad
खैर जड़ (khar Jad) Khar Root (मंगल ग्रह) Mars Planet
खैर या अनंतमूल की जड़ को मंगल ग्रह से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए धारण किया जाता है। ज्योतिष के मुताबिक, खैर की जड़ में मंगल ग्रह का वास होता है। यह जड़ मंगल के बुरे प्रभाव को कम करती है और इससे जुड़ी परेशानियों को दूर करती है। खैर की जड़ को लाल कपड़े में मंगलवार के दिन धारण किया जाता है। धारण विधि – मंगलवार के दिन खैर की जड़ की सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर खैर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।Anantmool ke Jad
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Anantmool ke Jad अनंतमूल की जड़ (Anantmool Root) (मंगल ग्रह) Mars Planet
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अनंतमूल की जड़ी मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव से बचाती है। ज्योतिष में मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस, ज़मीन और भाई का कारक होता है। मंगल दोष को दूर करने में अनंतमूल की जड़ी बेहद कारगर है। इसके अलावा यह जड़ी शारीरिक रोगों को दूर करती है।
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अनंतमूल की जड़ में मंगल ग्रह का वास होता है. इसे पहनने से मंगल के बुरे प्रभाव कम होते हैं। अनंतमूल की जड़ पहनने से साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
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यह जड़ राजनीति, नेतृत्व, प्रशासन, सेना, पुलिस, मेडिकल क्षेत्र, प्रॉपर्टी, ईंटभट्टे का काम करने वाले लोग पहन सकते हैं।
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जिन लोगों को अज्ञात भय रहता है, वे भी इसे पहन सकते हैं।
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अनंतमूल की जड़ को लाल रंग के कपड़े में बांधकर सीधे हाथ में बांधा जाता है।
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इसे पहनने का सबसे अच्छा दिन मंगलवार है।
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अनंतमूल की जड़ त्वचा, लिवर, पाइल्स और कब्ज की समस्या दूर करती है।
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अनंतमूल का उपयोग त्वचा रोगों के इलाज के लिए भी किया जाता है।
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अनंतमूल में घाव भरने और कुष्ठ-रोधी गुण हो सकते हैं।
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अनंतमूल में रक्तधातु के प्रति आकर्षण होने के कारण यह त्वचा पर मुँहासे और सूजन को दूर कर सकता है।
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धारण विधि – मंगलवार के दिन सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Bilwa Bel ke Jad
- Bel Bilwa Jad, बेल बिल्व जड़ (सूर्य ग्रह) Sun Planet (Bel Bilwa Root)
- ज्योतिष में सूर्य ग्रह को आत्मा का कारक माना जाता है। इस दिव्य जड़ी को धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सूर्य के नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ते हैं और उनको इससे सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इसके अलावा यह हृदय रोग, रीढ़ की हड्डी से संबंधित बीमारी, अपच, थकावट से भी मुक्ति दिलाने में सहायक है
- ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, बेल की जड़ से जुड़े कई फ़ायदे हैं। बेल की जड़ धारण करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मज़बूत होती है।
- बेल की जड़ धारण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है।इससे दिव, आंख, पित्त से जुड़े रोगों से मुक्ति मिलती है।
- नौकरी-पेशा लोगों को पदोन्नति और इंक्रीमेंट मिलता है।
- राजनीति में सफलता पाने के लिए बेल की जड़ धारण करना फ़ायदेमंद होता है।
- बेल की जड़ धारण करने से धन कमाने के अवसर मिलते हैं एवं कर्ज़ से छुटकारा मिलता है।
- बेल की जड़ को लाल कपड़े में बांधकर दाहिनी भुजा में सूर्य मंत्र के जाप के साथ पहनना चाहिए।
- वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, मेष, सिंह, और धनु लग्न एवं अन्य लग्न राशि के लोग बेल की जड़ धारण कर सकते हैं।
- धारण विधि – इस जड़ी को रविवार के दिन धारण करें। रविवार के दिन सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम सूर्य मंत्र (“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को पीले रंग के कपड़े में लपेटकर अपनी बाजु में कसकर बाँध लें।
Navgraha Jadi Kavach (नवग्रह जड़ी कवच)
“दिव्य तंत्र एस्ट्रो सिद्ध नवग्रह जड़ी यंत्र कवच”
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जिन्हें नवग्रहों के अनेक अशुभ एवं अनिष्ट दोष, अशुभ दशा/महादशा, ग्रह पीड़ा, कमजोर ग्रह, मारक प्रभाव जैसा अनेक कारण परेशानी एवं समस्याओं का सामना कर रहे है। नवग्रहों की अनुकूलता, शुभता, नवग्रह संबंधित सभी प्रकार के अनिष्ट एवं अशुभ दोषों के समन / शांति एवं सम्पूर्ण शुभ फल प्राप्ति हेतु शास्त्र वर्णित सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित कवच।
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इस दिव्य कवच में शास्त्र वर्णित दिव्य औषध नवग्रह वृक्षराज की जड़ को शास्त्र निर्देशित विधि से निमंत्रण एवं निवेदन विधि उपरांत विशेष शुभ नक्षत्र, वार एवं दिवस पर लाया जाता —
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जैसे, सूर्य ग्रह के लिए – मदार / बिल्वपत्र की जड़, चंद्र – पलास / खिरनी की जड़, मंगल – अनंतमूल / खैर की जड़ / बरगद जड़, बुद्ध – अपामार्ग / विधायरा की जड़, गुरु – भारंगी / केला की जड़, शुक्र – अरंड मूल / सरपोंखा / गूलर की जड़ / , शनि – बिच्छू / शम्मी की जड़, राहु – नागरमोथा की जड़ / सफ़ेद चंदन / दूर्वा दूब की जड़, एवं केतु – अश्वगंधा / कुश की जड़ को लिया गया हैं।
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इस दिव्य कवच में शुद्ध प्राकृतिक भोजपत्र पर हस्त निर्मित, शुद्ध अष्टगंध से शास्त्र निर्देशित विधि विधान से विशेष शुभ नक्षत्र एवं दिवस पर नवग्रह यंत्र का निर्माण किया जाता हैं।
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शास्त्र वर्णित पूर्ण विधि विधान के साथ सभी दिव्य नवग्रह औषध जड़ियों एवं नवग्रह यंत्र को शुद्ध ताम्र की ताबीज़ के साथ “तंत्र एस्ट्रो” के विद्वान् वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा आपके नाम और गोत्र से शुद्धिकरण की क्रिया, नवग्रह मंत्र द्वारा अभिमंत्रित, जागृत एवं प्राण प्रतिष्ठित किया जाता हैं ताकि इस कवच का संपूर्ण लाभ आपको मिले।
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इस कवच को 9 ग्रह/12 राशि एवं 27 नक्षत्र को ध्यान में रख कर निर्माण किया गया हैं। इसे कोई भी व्यक्ति, सभी राशि एवं लग्न के जातक/जातिका धारण कर सकते हैं। इस दिव्य कवच का किसी भी प्रकार का कोई भी दुष्परिणाम नहीं है।
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इस दिव्य कवच को मात्र लागत दक्षिणा पर आप सभी के लिए उपलब्ध कराया गया हैं ताकि अधिक से अधिक सभी वर्ग के लोगों को इस दिव्य कवच का संपूर्ण लाभ मिल सके
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Bargad ki Jad
- बरगद जड़ Bargad Jad, Bargad Root (Mars Planet) मंगल ग्रह
- ज्योतिष के मुताबिक, बरगद के पेड़ पर मंगल का आधिपत्य होता है। इसलिए, मंगल ग्रह से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए बरगद की जड़ धारण की जाती है.
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, बरगद के पेड़ में जगत के पालनहार विष्णु, भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा का वास होता है। इसलिए इस पेड़ की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को सौभाग्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है
- बरगद के पेड़ या पेड़ की जड़ का ज्योतिष, आयुर्वेदिक के साथ साथ तंत्र में भी अत्ययधिक महत्व हैं। इसकी जड़ ग्रहों की शांति करने के लिए उपयोगी है, इसकी जड़ चमत्कारिक रूप से लाभ देती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बरगद के वृक्ष पर मंगल का आधिपत्य होता है। इसलिए मंगल ग्रह की शांति के लिए बरगद की जड़ धारण करने का विधान है।
- बरगद की जड़ धारण करने से कुंडली का अंगारक दोष शांत होता है।
- भूमि, भवन, संपत्ति से जुड़े कामों में रुकावट आ रही हो, तो बरगद की जड़ धारण की जाती है।
- बरगद की जड़ धारण करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।
- बरगद की जड़ धारण करने से मानसिक शांति मिलती है और दिमाग़ केंद्रित होता है।
- बरगद की जड़ धारण करने से जीवन में आने वाली परेशानियों से राहत मिलती है।
- बरगद पेड़ की जड़ कर्ज से मुक्ति दिलवाने का प्रमुख मार्ग है। इसकी जड़ को पहनने से जल्दी कर्ज से मुक्ति मिल जाती है।
- बरगद की जड़ धारण करने से ना केवल मानसिक शांति और विचारों की शुद्धता प्राप्त होती है।
- बरगद की जड़ पहनने से स्त्रियों में रक्त संबंधी अनियमितताएं दूर हो जाती है।
- यदि किसी व्यक्ति का रोग लंबे समय से ठीक नहीं हो रहा है तो उसके तकिया के नीचे बरगद की जड़ रखें, उसके स्वास्थ्य में सुधार होने लगेगा।
- धारण विधि — मंगलवार के दिन सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Bharangi ki Jad
- भारंगी जड़ (Bharangi Jad) Jupiter Planet (गुरु ग्रह) Bharangi Root
- भारंगी की जड़ को धारण करने से गुरु ग्रह का दोष दूर होता है। बृहस्पति ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से बचने तथा मानसिक शांति और आध्यात्मिक ज्ञान पाने के लिए यह जड़ी वरदान हैं।
- हिन्दू ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति ग्रह गुरु, ज्ञान एवं सद्गुणों का कारक होता है। इस दिव्य जड़ी को धारण करने से जातक के स्वभाव में मानवीय प्रेम, धार्मिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान की वृद्धि होने लगती है।
- वैवाहिक जीवन में सुख शांति लाने एवं संतान प्राप्ति के लिए भी भारंगी की जड़ को धारण किया जाता है। जिन छात्रों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लगता है, उनके लिए भी यह जड़ विशेष लाभकारी है।
- भारंगी की जड़ को तुसोदक के साथ पीसकर वंक्षण हर्निया के इलाज में दिया जाता है
- भारंगी की जड़ के कई और फ़ायदे हैं जैसे कि मूत्र विकारों में फ़ायदेमंद, नेत्र रोगों में लाभदायक, मुंह संबंधी बीमारियों में फ़ायदेमंद, पसलियों के दर्द में फ़ायदेमंद, राजयक्ष्मा या टीबी के इलाज में फ़ायदेमंद, अतिसार या दस्त को रोकने में फ़ायदेमंद, पित्तज-शोध के इलाज में फ़ायदेमंद, योनि व्यापद के उपचार में फ़ायदेमंद, संधिशोध या गठिया में फ़ायदेमंद।
- बृहस्पति के दुष्प्रभावों को कम करना, यकृत विकार, मोच, चेचक, एलर्जी और जठरांत्र संबंधी विकार आदि रोगों का इलाज में।
- धारण विधि – गुरुवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम गुरु मंत्र (“ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ को पीले वस्त्र में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा कसकर बाँध लें।
Apamarga ke Jad
- Apamarga ke Jad अपामार्ग की जड़ (Apamarga Root) (बुध ग्रह) Mercury Planet.
- अपामार्ग की जड़ का इस्तेमाल बुध ग्रह के लिए किया जाता है। अपामार्ग को बुध ग्रह का सर्वश्रेष्ठ पौधा माना जाता है।
- अपामार्ग की जड़ का इस्तेमाल बुध ग्रह के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए किया जाता है।
- आयुर्वेद में सूजन रोधी एजेंट के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
- अपामार्ग की जड़ का चूर्ण घाव पर छिड़कने से त्वचा रोगों में आराम मिलता है।
- अपामार्ग की जड़ से आंखों की रोशनी बढ़ती है और आंखों में होने वाली चुभन, लालिमा, पानी आना, और दर्द से राहत मिलती है।
- अपामार्ग की जड़ से दांतों का दर्द दूर होता है और मुंह की दुर्गंध भी दूर होती है।
- अपामार्ग की जड़ से बवासीर, अपच, खांसी, अस्थमा, एनीमिया, पीलिया, और सांप के काटने में भी आराम मिलता है।
- अपामार्ग की जड़ का तेल कान के दर्द में इस्तेमाल किया जाता है।
- अपामार्ग की जड़ को पंचोपचार से पोंछकर दाहिनी भुजा पर धारण करने से कार्यों में सफलता मिलती है।
- अपामार्ग की जड़ को नवरात्रि, दिवाली या अन्य शुभ अवसरों पर घर की तिजोरी में रखने से अन्न और आर्थिक समृद्धि आती है।
- आयुर्वेद में लिखा हुआ है कि प्रसव के दौरान यदि इसकी जड़ को प्रसूता की नाभि में बांध दिया जाए तो प्रसव आसानी से हो जाता है।
- धारण विधि – बुधवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम बुध मंत्र (“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को हरा कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Palas ki Jad
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Palash Jad (पलाश जड़) Palash Root (चंद्र ग्रह) Moon Planet (Palash Root)
- ज्योतिष में पलाश के पेड़ और इसकी जड़ का बहुत महत्व है। पलाश (पलास, छूल, परसा, ढाक, टेसू, किंशुक, केसू) एक वृक्ष है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलों के कारण इसे “जंगल की आग” भी कहा जाता है।
- पलाश की जड़ में चंद्र ग्रह का वाश होता हैं। विधि विधान से इस दिव्य पलास जड़ को धारण करने से चंद्रमा जनित समस्त दोष एवं पीड़ाओं का समन होता हैं, चंद्र देव के कृपा दृष्टि प्राप्त होती हैं।
- पलाश के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु, और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है।
- पलाश के पेड़ का इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।
- रविवार के शुभ मुहूर्त में पलाश की जड़ को सूती धागे से लपेटकर दाहिने हाथ पर बांधने से बीमारियों में आराम मिलता है।
- पलाश की जड़ से निकलने वाले अर्क की दो बूंदें आंखों में डालने से नेत्र रोगों में लाभ मिलता है।
- पलाश की जड़ को शुभ मुहूर्त में किसी रविवार के दिन निकालकर दाहिनी भुजा में बांधने से ज्वर दूर होता है।
- जिन व्यक्तियों का सूर्य ग्रह पीढ़ित होकर अशुभ फल दे रहा है वे जातक पलाश की लकड़ी से हवन करे या फिर पलाश की जड़ को अभिमन्त्रित करके चांदी के लाकेट में गले में धारण करें।
- जिस जातक को अधिक परिश्रम करने पर भी व्यापार में सफलता नहीं मिल रही हो, तथा लगातार कर्ज की समस्या बढ़ रही हो। वह व्यक्ति शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को पलाश की जड़ लें आयें। इसे स्वच्छ जल से साफ कर लें उसके पश्चात एक कमरे में सुविधानुसार कोई स्थान चुन कर गंगाजल अथवा गोमूत्र से छींटे मारकर स्वच्छ कर लें एवं उसके उपर एक पात्र रखकर, पात्र पर लाल रेशमी कपड़ा बिछाए, पात्र के बीच में 7 प्रकार अनाज लेकर सभी को मिलाकर एक ढेरी बनायें। इस पर पलाश की जड़ रखें तथा इसी पर दीपक जलायें। धूप जलाकर लक्ष्मी जी के किसी भी मन्त्र की 3 या 4 माला का जाप करें। उसके पश्चात अब इस जड़ को एक लाल कपड़े में बांधकर अपने गल्ले या धन रखने के स्थान पर रख दें। मां लक्ष्मी की कृपा से आपकी आर्थिक तंगी एवं समस्यायें धीरे- धीरे दूर होकर आर्थिक सम्पन्नता आ जायेगी।
- धारण विधि – सोमवार के दिन पलाश जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम चंद्र मंत्र (“ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Madar ke Jad
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मदार जड़ Madar Jad (Madar Root) सूर्य ग्रह (Sun Planet)
- इसको ‘मंदार’, ‘आक’, ‘अर्क’ और ‘अकौआ’ भी कहते हैं। बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों में इसे ‘अकवन’ के नाम से जाना जाता है।
- ज्योतिष शास्त्र में मदार का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य से है।
- इस दिव्य जड़ी को विधिवत् धारण करने से सूर्य ग्रह जनित सभी दोषों का समन होता है एवं भगवान भास्कर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- ज्योतिष शास्त्र में मदार के पौधे और इसकी जड़ को कई फ़ायदों से जोड़ा गया है।
- मदार की जड़ को कमर में बांधने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- मदार की जड़ को अभिमंत्रित करके दाहिनी भुजा पर बांधने से सौभाग्य बढ़ता है।
- मदार के पौधे की जड़ को लाल धागे से बांधकर रोगी के पैर में बांधने से फ़ीलपांव में आराम मिलता है।
- मदार के पौधे को घर के सामने लगाने और नियमित रूप से पूजा करने से धन की कमी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
- मदार के पौधे को घर के अग्नि कोण यानी कि दक्षिण पूर्व के बीच दक्षिण या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए।
- मदार के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ़्लेमेटरी गुण होते हैं। इन पत्तों का इस्तेमाल करने से चोट जल्दी भरती है और बवासीर में भी आराम मिलता है।
- रविपुष्प नक्षत्र में लाई गई मदार की जड़ को दाहिने हाथ में धारण करने से आर्थिक समृधि में वृद्धि होती हैं।
- रविपुष्प में उसकी मदार की जड़ को बंध्या स्त्री भी कमर में बंधे तो संतान होगी।
- अगर किसी जातक पर तांत्रिक अभिकर्म किया गया है, तो मदार जड़ का एक टुकड़ा अभिमंत्रित करके कमर में बांधने से तांत्रिक क्रिया निष्फल हो जाती है।
- अगर कोई व्यक्ति गंभीर रोग से ग्रसित है, तो रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में मदार की जड़ को या बंध्या स्त्री अपनी कमर में बांध ले, तो उसे सन्तान का सुख अवश्य मिलेगा।
- अगर विवाह के काफी साल गुजर गए हैं और अभी तक बच्चे की किलकारियां आंगन में नहीं गूंजी हैं, तो शुक्रवार के दिन मदार पेड़ की जड़ को उखाड़ लें और फिर उसको उस कमरे में बांध दें, जिसकी संतान न हो रही हो।
- धारण विधि – रविवार के दिन मदार जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम सूर्य मंत्र (“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बांध लें।
Arandmool ki Jad
- अरंड मूल जड़ Arandmool jad शुक्र ग्रह (VENUS) Arandmool Root
- अरंड मूल की जड़ शुक्र ग्रह ग्रह से संबंधित है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र को विवाह, धन वैभव, काम आदि का कारक माना जाता है। अरंड मूल धारण करने से जातक के जीवन में प्रेम एवं विवाह संबंध अच्छा बना रहता है। इससे शुक्र के बुरे प्रभाव नष्ट हो जाते हैं।
- स्वास्थ्य की दृष्टि से यह जड़ी अस्थमा, ज्वर, खाँसी, फेफड़े और श्वसन नलिकाओं आदि से संबंधित रोगों को दूर करने में भी सहायक है।
- अरंडी की जड़ को छाछ के साथ पीसकर पीने से उल्टी और दस्त बंद हो जाते हैं।
- अरंडी की जड़ का ब्रेसलेट पहनने से सकारात्मक ऊर्जा और वाइब्स मिलते हैं
- धारण विधि – अरंड मूल को शुक्रवार के दिन धारण करना चाहिए। शुक्रवार के दिन सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी गर्दन में धारण करें।
Dhatura ki Jad
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Dhatura Jad धतूरा जड़ (Dhatura Root) शनि ग्रह (Saturn Planet)
- ज्योतिष के मुताबिक, धतूरे की जड़ से कई फ़ायदे होते हैं। धतूरे की जड़ को बांधने से धन से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं।
- सामान्य रूप से शनि ग्रह अच्छा नहीं माना जाता है, परंतु यदि जीवन में इसकी कृपा दृष्टि बरसती है तो व्यक्ति के भाग्य खुल जाते हैं। यह हमारे कर्म का कारक होता है। शनि दोष के कारण व्यक्ति का जीवन कष्टमय गुजरता है। इसलिए इसके बुरे प्रभाव से बचने एवं कृपा दृष्टि पाने के लिए जड़ को धारण करना शुभ माना जाता है। आयुर्वेद की दृष्टि से तंत्रिका और गठिया रोग से मुक्ति पाने के लिए भी यह बेहद कारगर है।
- अगर किसी व्यक्ति को शनि दोष है, तो शनिवार को धतूरे की जड़ को काले कपड़े में लपेटकर दाहिनी भुजा पर बांधना चाहिए।
- अगर किसी व्यक्ति को किसी से डर लगता है, तो अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ को घर में लाकर रखना चाहिए।
- धतूरे की जड़ को सोमवार को बाएं हाथ की कलाई में बांधने से कई समस्याओं का समाधान मिलता है।
- धतूरे की जड़ को घर के मेन गेट पर बांधने से धन की कमी नहीं होती और तिजोरी भरती है।
- धतूरे की जड़ से मस्तिष्क संबंधी रोगों में भी फ़ायदा मिलता है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनैश्चराय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी काले रंग के कपड़े में लपेटकर दाहिनी बाजू या कलाई में बाँधें।
Nagarmotha ke Jad
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नागरमोथा की जड़, राहु ग्रह (Rahu Planet) Nagar Motha ki jad (Nagar Motha Root)
- नागरमोथा की जड़ में राहु देव का वाश होता हैं, नागरमोथा की जड़ को धारण करने से राहु ग्रह संबंधित दोष दूर होते हैं एवं राहु देव की कृपा मिलती हैं।
- इससे मानसिक तनाव एवं पुरानो रोगों से मुक्ति मिलती है। यदि जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है तो इस जड़ को धारण करने से यह दोष शांत होता है। नागरमोथा की जड़ व्यक्ति में साहस बढती है और राह में आने वाली कठिनाई को दूर करती है।
- नागरमोथा की जड़ को धारण करने से साहस बढ़ता है और राह में आने वाली कठिनाइयां दूर होती हैं। शनिवार के दिन इस दिव्य जड़ी नागरमोथा की जड़ को धारण करें।
- इसे पुष्य नक्षत्र में ले आएं और बुधवार को नीले धागे में गले में धारण करें।
- मानसिक तनाव, शारीरिक रोग और काल सर्प दोष से बचने तथा नौकरी से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए नागरमोथा की जड़ वरदान साबित होती है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन नागरमोथा की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम राहु मंत्र (“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ को सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिने हाथ की बाजू में बाँध लें।
Pipal Ki Jad
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पीपल जड़ Pipal Jad (Pipal Root)
- पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए इसकी जड़ को धारण करना एवं घर के मुख्य द्वार पर बांधने से घर में सकारात्मकता आती है सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।
- इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और ग्रह दोष से भी छुटकारा मिलता है।
- शुक्रवार को पीपल की जड़ बांधने से घर की दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक स्थिति मज़बूत होती है।
- हाथ में पीपल की जड़ पहनना शुभ माना जाता है।
- पीपल की जड़ में अर्पित थोड़ा सा जल घर में लाकर छिड़कने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
- किसी मंदिर में पीपल का एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति की कुंडली के सभी ग्रह दोष शांत हो जाते हैं।
- पीपल के पेड़ की जड़ को घर के मुख्य द्वार पर बांधने से धन बाधित करने वाले दोषों को भी दूर किया जा सकता है। अगर घर के मुख्य द्वार पर पीपल की जड़ को शुक्रवार के दिन बांधा जाए तो इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत बनती है। तंगी, कर्ज, आखिक खर्च आदि से छुटकारा मिल जाता है।
- इसके अलावा, घर के मुख्य द्वार पर पीपल के पेड़ की जड़ बांधने से घर का वास्तु दोष भी दूर हो जाता है। अगर आपका घर या घर की कोई भी वस्तु उचित स्थान या उचित दिशा में नहीं है तो उससे पैदा होने वाला वास्तु दोष अपने आप खत्म हो जाएगा। साथ ही, ग्रह दोष से भी छुटकारा मिल जाएगा।
- ज्योतिष शास्त्र कहता है कि पीपल के पेड़ में सभी देवी और देवताओं का वास होता है। ऐसे में अगर पीपल के पेड़ की जड़ को घर के मुख्य द्वार पर बांधा जाए तो इससे घर के मुख्य द्वार पर दिव्य शक्तियों का संचार होने लगता है। घर के मुख्य द्वार पर सकारात्मकता बढ़ने लगती है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह नष्ट हो जाता है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन पीपल जड़ सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंत्र (“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को पीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बांधे।
Durva Ke Jad
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दूर्वा दूब जड़ (Durva Dub Jad) Rahu Planet (राहु ग्रह) Durva Dub Root
- दूर्वा जड़ी को हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना गया है। इसका इस्तेमाल पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में किया जाता है।
- दूर्वा को 'शतवल्ली' और 'शतपरवा' भी कहा जाता है।
- ज्योतिष शास्त्र में दूर्वा का बड़ा आध्यात्मिक महत्व है प्रत्येक शुभ कार्य में दूर्वा का उपयोग किया जाता है।
- राहु ग्रह संबंधित दोष निवृत्ति हेतु दूर्वा जड़ अत्यंत लाभकारी जड़ी सिद्ध होता है। शास्त्रअनुरुप विधिवत दूर्वा जड़ धारण करने से राहु जनित सभी दोषों का समन होता है।
- दूब के जड़ का काढ़ा पीने से वस्तिशोथ, सूजाक, और मूत्रदाह में आराम मिलता है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन दूर्वा जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम राहु मंत्र (“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रों सः राहवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को नीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Ashwagandha Ke Jad
- अश्वगंधा जड़ Ashwagandha Jad (केतु ग्रह) Ketu Planet, Ashwagandha Root
- अश्वगंधा की जड़ को लाल रंग के कपड़े में बांधकर मंगलवार या शनिवार को सीधे हाथ में बांधने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- केतु ग्रह समृद्धि, स्वास्थ्य, धन का प्रतीक माना जाता है। अश्वगंधा जड़ी धारण करने से व्यक्ति को सर्पदंश आदि का ख़तरा नहीं होता है। इसके साथ ही अश्वगंधा जड़ी केतु ग्रह के अन्य बुरे प्रभावों भी बचाती है। यह जातकों के रोग-दोष मुक्त करने में भी सहायक है। जैसे- चर्म रोग, मूत्र मार्ग में संक्रमण आदि।
- इससे सुख-समृद्धि आती है और पर्सनल और प्रोफ़ेशनल लाइफ़ में सम्मान बढ़ता है।
- अश्वगंधा की जड़ का प्रतिनिधि ग्रह केतु है। केतु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने और बुरे प्रभाव को कम करने में अश्वगंधा चमत्कार की तरह काम करता है।
- अश्वगंधा की जड़ को नीले रंग के कपड़े में बांधकर शनिवार को सीधे हाथ में बांधने से स्मॉलपॉक्स, यूरीन इंफ़ेक्शन, त्वचा संबंधी रोगों में आराम मिलता है।
- जीवन में चल रही मानसिक परेशानियां भी इससे कम होती हैं।
- धारण विधि – यह उपाय बुधवार के दिन करें। बुधवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम केतु मंत्र (“ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को काले रंग के कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Kush Ke Jad
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Kush Jad (कुश जड़) Kush Root (केतु ग्रह) Ketu Planet
- कुश को दर्भ और पवित्रम के नाम से भी जाना जाता है।
- कुश घास का इस्तेमाल पूजा-पाठ, श्राद्ध, और अन्य धार्मिक कामों में किया जाता है।
- केतु को अध्यात्म और मोक्ष का कारक माना गया है।
- कुश की जड़ में केतु देव का वाश होता हैं। इस दिव्य जड़ी को विधिवत् धारण करने से केतु ग्रह जनित सभी दोषों को समन होता हैं एवं केतु ग्रह का आशीष मिलता हैं।
- धनदायक कुश मूल – कुश की “जड़” को धन प्रदायनी कहा गया है। रवि पुष्य योग या रविपुष्य योग में जाकर कुश की जड़ लाकर कुश मूल की साधना की जाती है, सिद्ध करने के पश्चात कुश मूल को किसी लाल कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी या भण्डार गृह में रख दें, और प्रति दिन धूप दीप के द्वारा पूजन करते रहें। यह प्रयोग धन-धान्य बढ़ाने वाला कहा गया है।
- भावप्रकाश के मतानुसार कुश त्रिदोषघ्न और शैत्य-गुण-विशिष्ट है। उसकी जड़ से मूत्रकृच्छ, अश्मरी, तृष्णा, वस्ति और प्रदर रोग को लाभ होता है।
- गरुड़ जी अपनी माता की दासत्व से मुक्ति के लिए स्वर्ग से अमृत कलश लाये थे, उसको उन्होंने कुशों पर रखा था। अमृत का संसर्ग होने से कुश को पवित्री कहा जाता है। (महाभारत आदिपर्व के अध्याय 23 का 24 वां श्लोक) मान्यता है कि जब किसी भी जातक के जन्म कुंडली या लग्न कुण्डली में राहु/केतु महादशा की आती है तो कुश के पानी मे ड़ालकर स्नान करने से राहु/केतु की कृपा प्राप्त होती है।
- "नास्य केशान् प्रवपन्ति, नोरसि ताडमानते" – (देवी भागवत 19/32) अर्थात कुश धारण करने से सिर के बाल नहीं झडते और छाती में आघात यानी दिल का दौरा नहीं होता। उल्लेखनीय है कि वेद ने कुश को तत्काल फल देने वाली औषधि, आयु की वृद्धि करने वाला और दूषित वातावरण को पवित्र करके संक्रमण फैलने से रोकने वाला बताया है।

























