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Bargad ki Jad

Original price was: ₹999.00.Current price is: ₹499.00.
  • बरगद जड़ Bargad Jad, Bargad Root (Mars Planet) मंगल ग्रह
  • ज्योतिष के मुताबिक, बरगद के पेड़ पर मंगल का आधिपत्य होता हैइसलिए, मंगल ग्रह से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए बरगद की जड़ धारण की जाती है.
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार, बरगद के पेड़ में जगत के पालनहार विष्णु, भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा का वास होता है। इसलिए इस पेड़ की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को सौभाग्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है
  • बरगद के पेड़ या पेड़ की जड़ का ज्योतिष, आयुर्वेदिक के साथ साथ तंत्र में भी अत्ययधिक महत्व हैं। इसकी जड़ ग्रहों की शांति करने के लिए उपयोगी है, इसकी जड़ चमत्कारिक रूप से लाभ देती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बरगद के वृक्ष पर मंगल का आधिपत्य होता है। इसलिए मंगल ग्रह की शांति के लिए बरगद की जड़ धारण करने का विधान है।
  • बरगद की जड़ धारण करने से कुंडली का अंगारक दोष शांत होता है
  • भूमि, भवन, संपत्ति से जुड़े कामों में रुकावट आ रही हो, तो बरगद की जड़ धारण की जाती है
  • बरगद की जड़ धारण करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।
  • बरगद की जड़ धारण करने से मानसिक शांति मिलती है और दिमाग़ केंद्रित होता है
  • बरगद की जड़ धारण करने से जीवन में आने वाली परेशानियों से राहत मिलती है
  • बरगद पेड़ की जड़ कर्ज से मुक्ति दिलवाने का प्रमुख मार्ग है। इसकी जड़ को पहनने से जल्दी कर्ज से मुक्ति मिल जाती है।
  • बरगद की जड़ धारण करने से ना केवल मानसिक शांति और विचारों की शुद्धता प्राप्त होती है।
  • बरगद की जड़ पहनने से स्त्रियों में रक्त संबंधी अनियमितताएं दूर हो जाती है।
  • यदि किसी व्यक्ति का रोग लंबे समय से ठीक नहीं हो रहा है तो उसके तकिया के नीचे बरगद की जड़ रखें, उसके स्वास्थ्य में सुधार होने लगेगा।
  • धारण विधि — मंगलवार के दिन सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।

Bharangi ki Jad

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  • भारंगी जड़ (Bharangi Jad) Jupiter Planet (गुरु ग्रह) Bharangi Root
  • भारंगी की जड़ को धारण करने से गुरु ग्रह का दोष दूर होता है। बृहस्पति ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से बचने तथा मानसिक शांति और आध्यात्मिक ज्ञान पाने के लिए यह जड़ी वरदान हैं।
  • हिन्दू ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति ग्रह गुरु, ज्ञान एवं सद्गुणों का कारक होता है। इस दिव्य जड़ी को धारण करने से जातक के स्वभाव में मानवीय प्रेम, धार्मिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान की वृद्धि होने लगती है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख शांति लाने एवं संतान प्राप्ति के लिए भी भारंगी की जड़ को धारण किया जाता है। जिन छात्रों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लगता है, उनके लिए भी यह जड़ विशेष लाभकारी है।
  • भारंगी की जड़ को तुसोदक के साथ पीसकर वंक्षण हर्निया के इलाज में दिया जाता है
  • भारंगी की जड़ के कई और फ़ायदे हैं जैसे कि मूत्र विकारों में फ़ायदेमंद, नेत्र रोगों में लाभदायक, मुंह संबंधी बीमारियों में फ़ायदेमंद, पसलियों के दर्द में फ़ायदेमंद, राजयक्ष्मा या टीबी के इलाज में फ़ायदेमंद, अतिसार या दस्त को रोकने में फ़ायदेमंद, पित्तज-शोध के इलाज में फ़ायदेमंद, योनि व्यापद के उपचार में फ़ायदेमंद, संधिशोध या गठिया में फ़ायदेमंद।
  • बृहस्पति के दुष्प्रभावों को कम करना, यकृत विकार, मोच, चेचक, एलर्जी और जठरांत्र संबंधी विकार आदि रोगों का इलाज में।
  • धारण विधि – गुरुवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम गुरु मंत्र (“ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ को पीले वस्त्र में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा कसकर बाँध लें।

Apamarga ke Jad

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  • Apamarga ke Jad अपामार्ग की जड़ (Apamarga Root) (बुध ग्रह) Mercury Planet.
  • अपामार्ग की जड़ का इस्तेमाल बुध ग्रह के लिए किया जाता है। अपामार्ग को बुध ग्रह का सर्वश्रेष्ठ पौधा माना जाता है।
  • अपामार्ग की जड़ का इस्तेमाल बुध ग्रह के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए किया जाता है।
  • आयुर्वेद में सूजन रोधी एजेंट के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • अपामार्ग की जड़ का चूर्ण घाव पर छिड़कने से त्वचा रोगों में आराम मिलता है।
  • अपामार्ग की जड़ से आंखों की रोशनी बढ़ती है और आंखों में होने वाली चुभन, लालिमा, पानी आना, और दर्द से राहत मिलती है।
  • अपामार्ग की जड़ से दांतों का दर्द दूर होता है और मुंह की दुर्गंध भी दूर होती है।
  • अपामार्ग की जड़ से बवासीर, अपच, खांसी, अस्थमा, एनीमिया, पीलिया, और सांप के काटने में भी आराम मिलता है।
  • अपामार्ग की जड़ का तेल कान के दर्द में इस्तेमाल किया जाता है।
  • अपामार्ग की जड़ को पंचोपचार से पोंछकर दाहिनी भुजा पर धारण करने से कार्यों में सफलता मिलती है।
  • अपामार्ग की जड़ को नवरात्रि, दिवाली या अन्य शुभ अवसरों पर घर की तिजोरी में रखने से अन्न और आर्थिक समृद्धि आती है।
  • आयुर्वेद में लिखा हुआ है कि प्रसव के दौरान यदि इसकी जड़ को प्रसूता की नाभि में बांध दिया जाए तो प्रसव आसानी से हो जाता है।
  • धारण विधि – बुधवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम बुध मंत्र (“ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को हरा कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।

Palas ki Jad

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  • Palash Jad (पलाश जड़) Palash Root (चंद्र ग्रह) Moon Planet (Palash Root)

  • ज्योतिष में पलाश के पेड़ और इसकी जड़ का बहुत महत्व है। पलाश (पलास, छूल, परसा, ढाक, टेसू, किंशुक, केसू) एक वृक्ष है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलों के कारण इसे “जंगल की आग” भी कहा जाता है।
  • पलाश की जड़ में चंद्र ग्रह का वाश होता हैं। विधि विधान से इस दिव्य पलास जड़ को धारण करने से चंद्रमा जनित समस्त दोष एवं पीड़ाओं का समन होता हैं, चंद्र देव के कृपा दृष्टि प्राप्त होती हैं।
  • पलाश के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु, और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है।
  • पलाश के पेड़ का इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।
  • रविवार के शुभ मुहूर्त में पलाश की जड़ को सूती धागे से लपेटकर दाहिने हाथ पर बांधने से बीमारियों में आराम मिलता है।
  • पलाश की जड़ से निकलने वाले अर्क की दो बूंदें आंखों में डालने से नेत्र रोगों में लाभ मिलता है।
  • पलाश की जड़ को शुभ मुहूर्त में किसी रविवार के दिन निकालकर दाहिनी भुजा में बांधने से ज्वर दूर होता है।
  • जिन व्यक्तियों का सूर्य ग्रह पीढ़ित होकर अशुभ फल दे रहा है वे जातक पलाश की लकड़ी से हवन करे या फिर पलाश की जड़ को अभिमन्त्रित करके चांदी के लाकेट में गले में धारण करें।
  • जिस जातक को अधिक परिश्रम करने पर भी व्यापार में सफलता नहीं मिल रही हो, तथा लगातार कर्ज की समस्या बढ़ रही हो। वह व्यक्ति शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को पलाश की जड़ लें आयें। इसे स्वच्छ जल से साफ कर लें उसके पश्चात एक कमरे में सुविधानुसार कोई स्थान चुन कर गंगाजल अथवा गोमूत्र से छींटे मारकर स्वच्छ कर लें एवं उसके उपर एक पात्र रखकर, पात्र पर लाल रेशमी कपड़ा बिछाए, पात्र के बीच में 7 प्रकार अनाज लेकर सभी को मिलाकर एक ढेरी बनायें। इस पर पलाश की जड़ रखें तथा इसी पर दीपक जलायें। धूप जलाकर लक्ष्मी जी के किसी भी मन्त्र की 3 या 4 माला का जाप करें। उसके पश्चात अब इस जड़ को एक लाल कपड़े में बांधकर अपने गल्ले या धन रखने के स्थान पर रख दें। मां लक्ष्मी की कृपा से आपकी आर्थिक तंगी एवं समस्यायें धीरे- धीरे दूर होकर आर्थिक सम्पन्नता आ जायेगी।
  • धारण विधि – सोमवार के दिन पलाश जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम चंद्र मंत्र (“ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।

Madar ke Jad

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  • मदार जड़ Madar Jad (Madar Root) सूर्य ग्रह (Sun Planet)

  • इसको ‘मंदार’, ‘आक’, ‘अर्क’ और ‘अकौआ’ भी कहते हैं। बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों में इसे ‘अकवन’ के नाम से जाना जाता है।
  • ज्योतिष शास्त्र में मदार का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य से है।
  • इस दिव्य जड़ी को विधिवत् धारण करने से सूर्य ग्रह जनित सभी दोषों का समन होता है एवं भगवान भास्कर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • ज्योतिष शास्त्र में मदार के पौधे और इसकी जड़ को कई फ़ायदों से जोड़ा गया है।
  • मदार की जड़ को कमर में बांधने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • मदार की जड़ को अभिमंत्रित करके दाहिनी भुजा पर बांधने से सौभाग्य बढ़ता है।
  • मदार के पौधे की जड़ को लाल धागे से बांधकर रोगी के पैर में बांधने से फ़ीलपांव में आराम मिलता है।
  • मदार के पौधे को घर के सामने लगाने और नियमित रूप से पूजा करने से धन की कमी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • मदार के पौधे को घर के अग्नि कोण यानी कि दक्षिण पूर्व के बीच दक्षिण या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए।
  • मदार के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ़्लेमेटरी गुण होते हैं। इन पत्तों का इस्तेमाल करने से चोट जल्दी भरती है और बवासीर में भी आराम मिलता है।
  • रविपुष्प नक्षत्र में लाई गई मदार की जड़ को दाहिने हाथ में धारण करने से आर्थिक समृधि में वृद्धि होती हैं।
  • रविपुष्प में उसकी मदार की जड़ को बंध्या स्त्री भी कमर में बंधे तो संतान होगी।
  • अगर किसी जातक पर तांत्रिक अभिकर्म किया गया है, तो मदार जड़ का एक टुकड़ा अभिमंत्रित करके कमर में बांधने से तांत्रिक क्रिया निष्फल हो जाती है।
  • अगर कोई व्यक्ति गंभीर रोग से ग्रसित है, तो रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में मदार की जड़ को या बंध्या स्त्री अपनी कमर में बांध ले, तो उसे सन्तान का सुख अवश्य मिलेगा।
  • अगर विवाह के काफी साल गुजर गए हैं और अभी तक बच्चे की किलकारियां आंगन में नहीं गूंजी हैं, तो शुक्रवार के दिन मदार पेड़ की जड़ को उखाड़ लें और फिर उसको उस कमरे में बांध दें, जिसकी संतान न हो रही हो।
  • धारण विधि – रविवार के दिन मदार जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम सूर्य मंत्र (“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बांध लें।

Arandmool ki Jad

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  1. अरंड मूल जड़ Arandmool jad शुक्र ग्रह (VENUS) Arandmool Root
  2. अरंड मूल की जड़ शुक्र ग्रह ग्रह से संबंधित है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र को विवाह, धन वैभव, काम आदि का कारक माना जाता है। अरंड मूल धारण करने से जातक के जीवन में प्रेम एवं विवाह संबंध अच्छा बना रहता है। इससे शुक्र के बुरे प्रभाव नष्ट हो जाते हैं।
  3. स्वास्थ्य की दृष्टि से यह जड़ी अस्थमा, ज्वर, खाँसी, फेफड़े और श्वसन नलिकाओं आदि से संबंधित रोगों को दूर करने में भी सहायक है।
  4. अरंडी की जड़ को छाछ के साथ पीसकर पीने से उल्टी और दस्त बंद हो जाते हैं।
  5. अरंडी की जड़ का ब्रेसलेट पहनने से सकारात्मक ऊर्जा और वाइब्स मिलते हैं
  6. धारण विधि – अरंड मूल को शुक्रवार के दिन धारण करना चाहिए। शुक्रवार के दिन सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी गर्दन में धारण करें।

Dhatura ki Jad

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  • Dhatura Jad धतूरा जड़ (Dhatura Root) शनि ग्रह (Saturn Planet)

  • ज्योतिष के मुताबिक, धतूरे की जड़ से कई फ़ायदे होते हैं। धतूरे की जड़ को बांधने से धन से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं।
  • सामान्य रूप से शनि ग्रह अच्छा नहीं माना जाता है, परंतु यदि जीवन में इसकी कृपा दृष्टि बरसती है तो व्यक्ति के भाग्य खुल जाते हैं। यह हमारे कर्म का कारक होता है। शनि दोष के कारण व्यक्ति का जीवन कष्टमय गुजरता है। इसलिए इसके बुरे प्रभाव से बचने एवं कृपा दृष्टि पाने के लिए जड़ को धारण करना शुभ माना जाता है। आयुर्वेद की दृष्टि से तंत्रिका और गठिया रोग से मुक्ति पाने के लिए भी यह बेहद कारगर है।
  • अगर किसी व्यक्ति को शनि दोष है, तो शनिवार को धतूरे की जड़ को काले कपड़े में लपेटकर दाहिनी भुजा पर बांधना चाहिए।
  • अगर किसी व्यक्ति को किसी से डर लगता है, तो अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ को घर में लाकर रखना चाहिए।
  • धतूरे की जड़ को सोमवार को बाएं हाथ की कलाई में बांधने से कई समस्याओं का समाधान मिलता है।
  • धतूरे की जड़ को घर के मेन गेट पर बांधने से धन की कमी नहीं होती और तिजोरी भरती है।
  • धतूरे की जड़ से मस्तिष्क संबंधी रोगों में भी फ़ायदा मिलता है।
  • धारण विधि – शनिवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनैश्चराय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी काले रंग के कपड़े में लपेटकर दाहिनी बाजू या कलाई में बाँधें।

Nagarmotha ke Jad

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  • नागरमोथा की जड़, राहु ग्रह (Rahu Planet) Nagar Motha ki jad (Nagar Motha Root)

  • नागरमोथा की जड़ में राहु देव का वाश होता हैं, नागरमोथा की जड़ को धारण करने से राहु ग्रह संबंधित दोष दूर होते हैं एवं राहु देव की कृपा मिलती हैं।
  • इससे मानसिक तनाव एवं पुरानो रोगों से मुक्ति मिलती है। यदि जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है तो इस जड़ को धारण करने से यह दोष शांत होता है। नागरमोथा की जड़ व्यक्ति में साहस बढती है और राह में आने वाली कठिनाई को दूर करती है।
  • नागरमोथा की जड़ को धारण करने से साहस बढ़ता है और राह में आने वाली कठिनाइयां दूर होती हैं। शनिवार के दिन इस दिव्य जड़ी नागरमोथा की जड़ को धारण करें।
  • इसे पुष्य नक्षत्र में ले आएं और बुधवार को नीले धागे में गले में धारण करें।
  • मानसिक तनाव, शारीरिक रोग और काल सर्प दोष से बचने तथा नौकरी से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए नागरमोथा की जड़ वरदान साबित होती है।
  • धारण विधि – शनिवार के दिन नागरमोथा की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम राहु मंत्र (“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ को सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिने हाथ की बाजू में बाँध लें।

Pipal Ki Jad

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  • पीपल जड़ Pipal Jad (Pipal Root)

  • पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए इसकी जड़ को धारण करना एवं घर के मुख्य द्वार पर बांधने से घर में सकारात्मकता आती है सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।
  • इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और ग्रह दोष से भी छुटकारा मिलता है।
  • शुक्रवार को पीपल की जड़ बांधने से घर की दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक स्थिति मज़बूत होती है।
  • हाथ में पीपल की जड़ पहनना शुभ माना जाता है।
  • पीपल की जड़ में अर्पित थोड़ा सा जल घर में लाकर छिड़कने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
  • किसी मंदिर में पीपल का एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति की कुंडली के सभी ग्रह दोष शांत हो जाते हैं।
  • पीपल के पेड़ की जड़ को घर के मुख्य द्वार पर बांधने से धन बाधित करने वाले दोषों को भी दूर किया जा सकता है। अगर घर के मुख्य द्वार पर पीपल की जड़ को शुक्रवार के दिन बांधा जाए तो इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत बनती है। तंगी, कर्ज, आखिक खर्च आदि से छुटकारा मिल जाता है।
  • इसके अलावा, घर के मुख्य द्वार पर पीपल के पेड़ की जड़ बांधने से घर का वास्तु दोष भी दूर हो जाता है। अगर आपका घर या घर की कोई भी वस्तु उचित स्थान या उचित दिशा में नहीं है तो उससे पैदा होने वाला वास्तु दोष अपने आप खत्म हो जाएगा। साथ ही, ग्रह दोष से भी छुटकारा मिल जाएगा।
  • ज्योतिष शास्त्र कहता है कि पीपल के पेड़ में सभी देवी और देवताओं का वास होता है। ऐसे में अगर पीपल के पेड़ की जड़ को घर के मुख्य द्वार पर बांधा जाए तो इससे घर के मुख्य द्वार पर दिव्य शक्तियों का संचार होने लगता है। घर के मुख्य द्वार पर सकारात्मकता बढ़ने लगती है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह नष्ट हो जाता है।
  • धारण विधि – शनिवार के दिन पीपल जड़ सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंत्र (“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को पीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बांधे।

Durva Ke Jad

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  • दूर्वा दूब जड़ (Durva Dub Jad) Rahu Planet (राहु ग्रह) Durva Dub Root

  • दूर्वा जड़ी को हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना गया है। इसका इस्तेमाल पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में किया जाता है।
  • दूर्वा को 'शतवल्ली' और 'शतपरवा' भी कहा जाता है।
  • ज्योतिष शास्त्र में दूर्वा का बड़ा आध्यात्मिक महत्व है प्रत्येक शुभ कार्य में दूर्वा का उपयोग किया जाता है।
  • राहु ग्रह संबंधित दोष निवृत्ति हेतु दूर्वा जड़ अत्यंत लाभकारी जड़ी सिद्ध होता है। शास्त्रअनुरुप विधिवत दूर्वा जड़ धारण करने से राहु जनित सभी दोषों का समन होता है।
  • दूब के जड़ का काढ़ा पीने से वस्तिशोथ, सूजाक, और मूत्रदाह में आराम मिलता है।
  • धारण विधि – शनिवार के दिन दूर्वा जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम राहु मंत्र (“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रों सः राहवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को नीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।

Ashwagandha Ke Jad

Original price was: ₹999.00.Current price is: ₹499.00.
  • अश्वगंधा जड़ Ashwagandha Jad (केतु ग्रह) Ketu Planet, Ashwagandha Root
  • अश्वगंधा की जड़ को लाल रंग के कपड़े में बांधकर मंगलवार या शनिवार को सीधे हाथ में बांधने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
  • केतु ग्रह समृद्धि, स्वास्थ्य, धन का प्रतीक माना जाता है। अश्वगंधा जड़ी धारण करने से व्यक्ति को सर्पदंश आदि का ख़तरा नहीं होता है। इसके साथ ही अश्वगंधा जड़ी केतु ग्रह के अन्य बुरे प्रभावों भी बचाती है। यह जातकों के रोग-दोष मुक्त करने में भी सहायक है। जैसे- चर्म रोग, मूत्र मार्ग में संक्रमण आदि।
  • इससे सुख-समृद्धि आती है और पर्सनल और प्रोफ़ेशनल लाइफ़ में सम्मान बढ़ता है
  • अश्वगंधा की जड़ का प्रतिनिधि ग्रह केतु हैकेतु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने और बुरे प्रभाव को कम करने में अश्वगंधा चमत्कार की तरह काम करता है
  • अश्वगंधा की जड़ को नीले रंग के कपड़े में बांधकर शनिवार को सीधे हाथ में बांधने से स्मॉलपॉक्स, यूरीन इंफ़ेक्शन, त्वचा संबंधी रोगों में आराम मिलता है
  • जीवन में चल रही मानसिक परेशानियां भी इससे कम होती हैं
  • धारण विधि – यह उपाय बुधवार के दिन करें। बुधवार के दिन जड़ी को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम केतु मंत्र (“ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को काले रंग के कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।

Kush Ke Jad

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  • Kush Jad (कुश जड़) Kush Root (केतु ग्रह) Ketu Planet

  • कुश को दर्भ और पवित्रम के नाम से भी जाना जाता है।
  • कुश घास का इस्तेमाल पूजा-पाठ, श्राद्ध, और अन्य धार्मिक कामों में किया जाता है।
  • केतु को अध्यात्म और मोक्ष का कारक माना गया है।
  • कुश की जड़ में केतु देव का वाश होता हैं। इस दिव्य जड़ी को विधिवत् धारण करने से केतु ग्रह जनित सभी दोषों को समन होता हैं एवं केतु ग्रह का आशीष मिलता हैं।
  • धनदायक कुश मूल – कुश की “जड़” को धन प्रदायनी कहा गया है। रवि पुष्य योग या रविपुष्य योग में जाकर कुश की जड़ लाकर कुश मूल की साधना की जाती है, सिद्ध करने के पश्चात कुश मूल को किसी लाल कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी या भण्डार गृह में रख दें, और प्रति दिन धूप दीप के द्वारा पूजन करते रहें। यह प्रयोग धन-धान्य बढ़ाने वाला कहा गया है।
  • भावप्रकाश के मतानुसार कुश त्रिदोषघ्न और शैत्य-गुण-विशिष्ट है। उसकी जड़ से मूत्रकृच्छ, अश्मरी, तृष्णा, वस्ति और प्रदर रोग को लाभ होता है।
  • गरुड़ जी अपनी माता की दासत्व से मुक्ति के लिए स्वर्ग से अमृत कलश लाये थे, उसको उन्होंने कुशों पर रखा था। अमृत का संसर्ग होने से कुश को पवित्री कहा जाता है। (महाभारत आदिपर्व के अध्याय 23 का 24 वां श्लोक) मान्यता है कि जब किसी भी जातक के जन्म कुंडली या लग्न कुण्डली में राहु/केतु महादशा की आती है तो कुश के पानी मे ड़ालकर स्नान करने से राहु/केतु की कृपा प्राप्त होती है।
  • "नास्य केशान् प्रवपन्ति, नोरसि ताडमानते" – (देवी भागवत 19/32) अर्थात कुश धारण करने से सिर के बाल नहीं झडते और छाती में आघात यानी दिल का दौरा नहीं होता। उल्लेखनीय है कि वेद ने कुश को तत्काल फल देने वाली औषधि, आयु की वृद्धि करने वाला और दूषित वातावरण को पवित्र करके संक्रमण फैलने से रोकने वाला बताया है।

Seven Chakar Stone Tree 1500 Stone

Original price was: ₹12,599.00.Current price is: ₹4,595.00.
Beautiful Premium Quality Natural Seven Chakra Stone Tree🌲
✅Made by 1500 Stone
✅22-25 Inch Height
✅4 KG Weight Approx
✅Worldwide Shipping Available
A seven chakra tree, often made from gemstones and designed as a decorative or healing tool, help balance and align the seven main energy centers (chakras) in the body
1. Energy Balance: Helps balance the energy flow in the body by aligning the chakras, promoting harmony and vitality.
2. Stress Relief: The calming energy of the gemstones can reduce stress and anxiety, creating a peaceful environment.
3. Focus and Clarity: Enhances concentration and mental clarity by removing blockages in the energy pathways.
4. Spiritual Growth: Encourages self-awareness and spiritual development by connecting you to higher states of consciousness.
5. Healing Properties: Each chakra stone is associated with specific healing properties, supporting physical and emotional well-being.
6. Positive Energy: Attracts and amplifies positive vibrations, dispelling negativity in your space.
7. Enhanced Creativity: Opens up the sacral chakra, inspiring creativity and innovation.
8. Improved Relationships: Balances the heart chakra, fostering compassion, love, and understanding.
9. Manifestation: Aligns intentions with universal energy, making it easier to manifest goals and desires.
10. Aesthetic Appeal: Besides its spiritual significance, it serves as a beautiful decorative piece that enhances the ambiance of any room.

Seven Chakar Stone Tree

Original price was: ₹2,500.00.Current price is: ₹1,249.00.

Beautiful Natural Seven Chakra Stone Tree, 500 Stone

Natural Shukra Mani

Original price was: ₹25,000.00.Current price is: ₹11,995.00.
100% Pure & Natural Energized Shukra Mani (शुक्र मणि) Rare & Biggest Size, 100 Carat Size Approx, Made In Silver Pendant.
it is mandatory to get the grace of Venus planet for the help of love, wealth, attraction, beauty and happiness in life and Venus brings grace to God Shukra Mani is a miraculous mani works for you to please Venus, the god of happiness and love Venus’s gem can make your life full of pleasures and rich with wealth.

Natural Pathri Rudraksha Mala, 6MM Size

Original price was: ₹6,985.00.Current price is: ₹2,345.00.

Super Premium Quality Natural Pathri Rudraksha Mala, One of the Best Quality Rudraksha Mala, 109 Beads, 6mm Size (पथरी रुद्राक्ष माला)

7 Mukhi Nepali Rudraksha Cash Box

Original price was: ₹3,600.00.Current price is: ₹1,699.00.
ENERGIZED SEVEN MUKHI RUDRAKSHA Deity: Devi Mahalakshmi Ruling Planet: Saturn Beej Mantra: Om Hum Namah: | ॐ हुं नम | II सप्तवक्त्रो महेशानि ह्यनंगो नाम नामतः धारणात्तस्य देवेशिदरिद्रो पीश्वरो भवेत् II ७२ हे महेश्वरि ! सात मुखवाला रुद्राक्ष अनंग नाम से प्रसिद्ध है। हे देवेशि ! उसको धारण करने से दरिद्र भी ऐश्वर्यशाली हो जाता है ॥ — शिवमहापुराण अध्याय 25

Energized Garbh Gauri Rudraksha Nepali

Original price was: ₹15,890.00.Current price is: ₹6,500.00.
GARBH GAURI RUDRAKSHA ( गर्भ गौरी रुद्राक्ष ) ◾It is recommended to those women who are not able to conceive or those who suffer repeated miscarriages or any dysfunction related to child birth. ◾Garbha Gauri Rudraksha is for the Garbha (uterus) health of the mother and the child inside the uterus. So if the mother is not getting pregnant, she should wear this to conceive. ◾If the mother is already pregnant, they should wear this for a healthy 9 months delivery period. If the mother has already delivered the child, she should wear this for a healthy and happy childhood for the child. ◾It is associated with the powers and blessings of Maa Parvati and Lord Ganesha. Garbha Gauri Rudraksha is the blessing of Lord Ganesha, Lord Shiva, Goddess Parvati, and Lord Kamadeva. It is also blessed by the planet Venus (Shukra). ◾This means the wearer is always going to be in the strongest and safest hands and the child too will have all the blessings in advance and in disguise of the Rudraksha beads and the mother. ◾Garbh Gauri Rudraksha brings immense blessings to goddess Parvati. The rudraksha cures ailments and doshas associated with the Venus planet. ◾The rudraksha embraces life with joy and tranquility. It helps get rid of negativity and makes life incredibly glorious. The rudraksha aids women in having children easily and naturally. It speeds up the labor process and makes delivery simple. ◾Additionally, it grants a harmonious and loving bond between mother and kid.

Shree Laxmi Ganesh Rudraksha

Original price was: ₹3,750.00.Current price is: ₹1,899.00.
Best Quality & Energized Shree Laxmi & Ganesh Nepali Rudraksha To establish in worship or wealth place with beautiful Wooden Box.
  Lakshmi Ganesh Rudraksha, the visible form of Goddess Lakshmi and Lord Ganesha, must be establish in the place of worship or wealth.
The effects of this divine Rudrakshas are observed to be good starting a new journey and for financial stability, prosperity, growth & the blessings of Goddess Mahalakshmi and Lord Ganesha always remain on your entire family.
The Ganesh Laxmi is represented by Lord Ganesh and Goddess Laxmi, the Goddess of wealth. The Ganesh Rudraksha – Power of Vighnaharta to overcome all obstacles and bring you Success & Its believed to remove obstacles, bring luck and prosperity and also give blessings to start a new work.
The 7 Mukhi Mahalaxmi Rudraksha is believed to bless a person with wealth, prosperity and abundance by helping the wearer make better decisions related to finance and wealth.
You must keep this Ganesh + Laxmi Rudraksha in your MANDIR / WEALTH Place to get the positive effect of this rudraksha. Representative deity: Lord Ganesha and Devi Maha Lakshmi

Pure Ashtagandha Chandan

Original price was: ₹999.00.Current price is: ₹499.00.

Tantra Astro Pure & Original Ashtagandha Danedaar Chandan (शुद्ध अष्टगंध चंदन) pack of 100 gram, It is made forusing holy mixtures of pure eight fragnance herbs which are (सफ़ेद या लाल चन्दन ) (White or Red Chandana) अगर (Agar) कपूर (kapoor or Camphor)कचूर (Kachoor) कुमकुम (रोली ) (Kumkum) गोरोचन (Gorochan) जटामासी (Jatamasi) रक्तचंदन (Raktchandana), Weight - 100 gram

Natural Energized Big Moti Shankh

Original price was: ₹5,385.00.Current price is: ₹2,500.00.
मोती शंख के चमत्कार :- ✅मोती शंख को " दारिद्र्य -निवारक" कहा गया है। जिसे साक्षात मां लक्ष्मी का ही स्वरूप माना जाता है। अतः यदि इस शंख को घर, व्यापार स्थल या कारखाने में स्थापित किया जाए तो स्वतः ही उसकी सम्पूर्ण दरिद्रता समाप्त हो जाती है और घर व्यापार में आशातीत वृद्धि और सुख समृद्धि का वास होने लग जाती है । ✅यदि मन्त्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित मोती-शंख अपने पूजा स्थान में रखा / स्थापित किया जाए तथा उसमें जल भरकर लक्ष्मी के चित्र पर चढाया जाए तो लक्ष्मी प्रसन्न होती है और आर्थिक उन्नति होना प्रारंभ हो जाती है । ✅मोती शंख को अपने बिस्तर के नजदीक रखें। इससे कमरे के आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी और पति-पत्नी में प्रेम बढ़ेगा । ✅मोती शंख में चावल भरकर मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्ति के सिर के ऊपर से सात बार उतार कर जल में प्रवाहित कर देने से उसे रोग से मुक्ति मिल सकती है । ✅अगर आप लगातार धन की कमी का सामना कर रहे है तो मोती शंख के इस्तेमाल से अपनी धन की कमी को दूर कर सकते है । ✅मोती शंख आर्थिक कमी को दूर करने में सक्षम होता है, इस शंख को घर में रखने से कई प्रकार के फायदे होते है, मोती शंख को घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और सदस्यों को मानसिक शांति मिलती है । ✅मोती शंख को तिजोरी में रखना काफी शुभ माना जाता है, तिजोरी में रखने से तिजोरी हमेशा पैसो से भरी रहती है । ✅मोती शंख को रात्रि में पानी से भरे किसी कांच के बर्तन में रखें। प्रातः उस पानी को पी लें। यह क्रिया रोज करें, चेहरे पर चमक व कांति आएगी पेट और आंतों से जुड़ी कई प्रकार के रोग दूर होंगे । ✅इस शंख को रोज चेहरे पर हल्के-हल्के फेरें, जिससे आपका चेहरा मोती की तरह चमकने लगेगा। यह क्रिया करने से लड़कियों के चेहरों पर पड़ने वाले दाग व मुंहासे शीघ्र दूर होने लगते हैं । ✅मोती शंख को लक्ष्मी स्वरूप माना गया है, अगर मोती शंख बिना सिद्ध किए भी घर में रखा जाए तो भी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, घर में खुशियां सुख समृद्धि और वैभव का निवास होता है । ✅शुक्रवार के दिन शंख को साफ धोकर इसमें शुद्ध जल भरकर पूजन करने से समृद्धि प्राप्त होती है, शंख में भरा जल पीना और इसका जल अपनी पूरे घर और आंगन में छिड़कना बेहद अच्छा होता है । ✅मोती शंख को घर में स्थापित कर दें और रोज इस मंत्र का जप "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः" 11 बार बोलकर एक-एक चावल का दाना शंख में डाले, इस प्रकार 108 दाने इस शंख में डालें और इस प्रकार 11 दिन तक प्रयोग करें, यह प्रयोग इतना शकतिशाली है कि यदि इसे कोई भी व्यक्ति लगातार करे तो व्यक्ति की जन्म - जन्म कि दरिद्रता दूर हो जाती है । ✅यदि घर में कोई बहुत बीमार हो, तो मोती शंख में जल भर कर पूजा घर में रखें और दवाई का सेवन मोती शंख के जल से करवाएं, बीमार में सुधार आने लगेगा और वह शीघ्र ही पूरी तरह ठीक हो जाएगा ।

Certified Natural Pyrite Stone

Original price was: ₹2,250.00.Current price is: ₹799.00.
Certified Natural Pyrite 10-12 Carat (प्राकृतिक पाइराइट) Polished
  • This crystal is for money and abundance.
  • Pyrite is a wonderful tool to work for money enhancements.
  • Pyrite is also called 'fool's gold.
  • Pyrite is also referred to as the Stone of Wealth.
  • If you are a business owner pyrite is a must for you.
  • Pyrite also works for people who are in jobs as it helps them to find the right path and career.
  • Pyrite attracts money, it’s known to be a money magnet.

Natural Ek Mukhi Rudraksha Ring

Original price was: ₹9,499.00.Current price is: ₹2,899.00.

Natural & Energized One Face Ek Mukhi Indonesia Java Rudraksha Pure Silver Ring, 10-12 MM Rudraksha Size, Adjustable Ring

एकवक्त्रः शिवः साक्षाद्भुक्तिमुक्तिफलप्रदः तस्य दर्शनमात्रेण ब्रह्महत्या व्यपोहति ६४ एक मुखवाला रुद्राक्ष साक्षात् शिव का स्वरूप है। वह भोग और मोक्षरूपी फल प्रदान करता है। उसके दर्शनमात्र से ही ब्रह्महत्या का पाप नष्ट हो जाता है ॥ ६४ ॥ यत्र संपूजितस्तत्र लक्ष्मीर्दूरतरा न हि नश्यंत्युपद्र वाः सर्वे सर्वकामा भवंति हि ६५ जहाँ रुद्राक्ष की पूजा होती है, वहाँ से लक्ष्मी दूर नहीं जातीं, उस स्थान के सारे उपद्रव नष्ट हो जाते हैं तथा वहाँ रहनेवाले लोगों की सम्पूर्ण कामनाएँ पूर्ण होती हैं ॥ ६५ ॥ (शिव महापुराण अध्याय 25)

Natural Seven Chakra Stone Tree

Original price was: ₹1,899.00.Current price is: ₹899.00.

One Face Rudraksha Mala Java Indonesia

Original price was: ₹75,000.00.Current price is: ₹45,000.00.
Best Quality Abhimantrit One Face Ek Mukhi Rudraksha Mala Java Indonesia, (एक मुखी इंडोनेशियन रुद्राक्ष माला) 108+1 Beads, 8-10 MM Size Beads, Indonesia Java Rudraksha

Silver Solid Kada

Original price was: ₹6,000.00.Current price is: ₹4,500.00.

Sri Dhan Laxmi Kuber Dhan Varsha Yantra

Original price was: ₹999.00.Current price is: ₹599.00.
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